सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

❤️राधे राधे❤️

बालकों में जो स्थान #नचिकेता का है वही स्थान स्त्रियों में #सावित्री का है। आइए अध्ययन करें। अभी कुछ दिन पहले भारत में नारी की दशा पर एक चर्चा हो रही थी। मेरे एक प्रखर वामपंथी मित्र जिनकी दो पुस्तक तीन बार रीप्रिंट हो चुकी हैं बोल उठे ! भारतीय समाज ने नारी को बेचारी #सती सावित्री बना दिया है ! इस पर काफ़ी तालियाँ बजीं। मैं तो दर्शक मात्र था, वक्ता नहीं  किन्तु चर्चा के बाद प्रश्नोत्तर की व्यवस्था थी।  तो मैने वक्ता से प्रश्न किया कि क्या आप सती अथवा सावित्री के विषय में जानते हैं?

वक्ता ने कहा , ”हाँ जानता हूँ “ 

मैने प्रार्थना किया , ”थोड़ा बताइए “

तो उन्होंने  सती के बारे तो कुछ नहीं बताया किंतु सावित्री के बारे में बोलने लगे, ”सावित्री को सती दिखाने के लिए व्रत पाठ पूजा गले डाल दी है, मैं पूछता हूँ, पुरुष क्यों नहीं पत्नी के लिए व्रत रखते हैं ? ” 
श्रोताओं को आनंद आ रहा था।

मैने कहा, ”मान्यवर आप तो अपनी बात कह चुके अब मेरे प्रश्न की बारी है तो मुझे सवाल करने का अवसर दें “

वे बोले पूछिए!

अब मैने कहा , ”सावित्री का विवाह कैसे हुआ था“ 

उन्होंने बताया कि पिता के कहने पर वे स्वयं अपने लिए उचित वर खोजने गयीं थीं! मैंने सभा में उपस्थित महिलाओं से पूछा, ”आप सफल महिलाओं में से किन किन को घर से यह आज़ादी मिली है ?”

अब महिलाओं के सिर नीचे झुक गए, किसी ने भी इस आज़ादी के मिलने की बात नहीं कही, मैंने वक्ता से पूछा, ”कितनी आधुनिक सशक्त महिला राजा की बेटी होने पर भी एक लकड़ी काटने वाले को पति चुन लेंगी, जिसके माता पिता अंधे हैं?"

सभा में फिर सन्नाटा था! अब मैं प्रश्न पूछने वाला और  पूरी सभा  उत्तर दायी थी। मैंने फिर सवाल किया, जब सावित्री ने #सत्यवान से विवाह की बात कही तो देवर्षि नारद ने क्या कहा?

वक्ता ने उत्तर दिया , ”सत्यवान की आयु मात्र एक वर्ष है, इससे विवाह नहीं करना चाहिए“ 

सावित्री ने क्या कहा ? “मैंने जिसे एक बार पति मान लिया  तो मान लिया, विवाह करूँगी तो उसी से“

“माता पिता और #देवर्षि_नारद की बात को ठुकरा कर अपने मन की  बात पूरी करने वाली बेचारी कैसे है !”

इस बात पर सभा में सन्नाटा था और महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान!! चर्चा यहीं  समाप्त हुई। कुछ महिलाओं ने आकर धन्यवाद दिया कि उन्होंने कभी ऐसे सोचा ही न था !

अब आप भी सावित्री सत्यवान का संवाद सुनें और देखें कि कमजोर कौन है ! पूरी कथा लम्बी है तो सत्यवान के प्राण हर कर के जाते हुए यम का मार्ग रोकती सावित्री को यम कहते हैं , ”अब तू लौट जा, सत्यवान का अन्त्येष्टि-संस्कार कर। अब तू पति के ऋण से उऋण हो गयी। पति के पीछे तुझे जहाँ तक आना चाहिये था, तू वहाँ तक आ चुकी।”

सावित्री “जहाँ मेरे पति ले जाये जाते हैं अथवा ये स्वयं जहाँ जा रहे हैं, वहीं मुझे भी जाना चाहिये; यही सनातन धर्म है। तपस्या, गुरुभक्ति, पतिप्रेम, व्रतपालन तथा आपकी कृपा से मेरी गति कहीं भी रुक नहीं सकती।”

कितनी महिलाएँ विपदा में यह सामर्थ्य रखती हैं? महाभारत वनपर्व के पतिव्रता माहात्म्य पर्व के अंतर्गत अध्याय 297 में सावित्री और यम के संवाद का वर्णन हुआ है।

तब यमराज ने उसे समझाते हुए कहा, ”मैं उसके प्राण नहीं लौटा सकता। तुम और कोई मनचाहा वर मांग लो।”

तब सावित्री ने वर में अपने श्वसुर की आंखें मांग ली। 

#यमराज ने कहा तथास्तु!!

फिर उनके पीछे चलने लगी। तब यमराज ने उसे फिर समझाया और वर मांगने को कहा। उसने दूसरा वर मांगा कि मेरे श्वसुर को उनका राज्य वापस मिल जाए।

तीसरा वर मांगा, मेरे पिता जिन्हें कोई पुत्र नहीं हैं उन्हें सौ पुत्र हों। 
यह वर मिलने के बाद भी सावित्री यम के पीछे आती रही !

यहाँ यह विचार करना ज़रूरी है कि यमराज कोई कृपा नहीं कर रहे हैं, जिसकी मृत्यु नहीं आती है वे उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते , जो स्त्री उनके पीछे आ रही है उसका तप और सिद्धि स्पष्ट दिख रही है। तब वे वर देकर अपनी जान छुड़ा रहे हैं, क्योंकि यदि आज सत्यवान जीवित हो उठा तो मृत्यु की अजेयता ख़तरे में हैं, यहाँ सावित्री सर्वशक्तिमान है और सर्वशक्तिमान ‘यम‘ नियमों से बांधे गए एक मजबूर देवता हैं।

अब आगे सावित्री का वाक् कौशल देखें , और वह भी यम के सामने जो कि सूर्य के पुत्र हैं और नचिकेता को अमरता की दीक्षा दे चुके हैं। 

यमराज ने फिर कहा, ”सावित्री तुम वापस लौट जाओ, चाहो तो मुझसे कोई और वर मांग लो। 

तब सावित्री ने कहा मुझे सत्यवान से सौ यशस्वी पुत्र हों। “यमराज ने कहा, ”तथास्तु।”

अब सावित्री पूछती हैं, ”बिना पति पुत्र कैसे“ और तब लाचार होकर यम सत्यवान के प्राण मुक्त कर जीवन देते हैं!

यहाँ आप #हनुमान और #सुरसा के संवाद को याद करें.... कैसे चतुर हनुमान विशालकाय सुरसा के मुख में प्रवेश कर बाहर आ जाते हैं और सुरसा के उन्हें खा लेने के संकल्प को पूरा भी कर देते हैं और जीवित भी रहते हैं ! 

आज सावित्री उससे भी अद्भुत कार्य कर रही हैं। वे सास ससुर की आँखें, राज्य , अपने लिए भाई और पति का जीवन  ला रही हैं और वह भी बिना युद्ध, बिना कोर्ट कचहरी के !

जब मैं सती, सावित्री, #सीता, #द्रौपदी का जीवन देखता हूं तो मुझे पुरुष बौने लगते हैं !

आप सोचिए कि द्रौपदी को सभा में बुलाया जा रहा है कि युधिष्ठिर ने उसे दांव में खो दिया है और #दुर्योधन ने उसे सभा में बुलाया है?

ऐसी विपदा में द्रौपदी का विवेक देखें, वह सवाल करती है, ”दांव पर मुझे राजा #युधिष्ठिर ने लगाया या दास युधिष्ठिर ने ??“ 

दुर्योधन जान गया कि युधिष्ठिर को द्रौपदी को दांव पर लगाने की पात्रता ही नहीं थी। अब वह उत्तर नहीं देता... अपितु दूत को कहता है कि द्रौपदी से कहो कि जो भी सवाल करना है वह सभा में करना।

तो यहाँ सभा पांडव, कौरव, #द्रोण, #भीष्म सब तर्क में पराजित हैं... दुष्ट दुशासन पशुबल का प्रयोग करता है और आयु, राज्य खो देता है!
लाचार कही जाने वाली द्रौपदी एक नागिन की तरह फुफकारती  है, दुशासन के रक्त से अपने बाल धोने की शपथ लेती है! पूरा करती है, कृष्ण जब संधि के लिए जा रहे थे... द्रौपदी अपने खुले केश दिखा कर कृष्ण  को संकेत करती है कि उसे क्या चाहिए!

क्या यह ज्ञान, यह कठोर प्रतिज्ञा, यह दंड यह भेद जानने और अपनाने वाले को अबला कह सकते हैं।

अब आज फिर वट सावित्री के स्मरण का दिन है। हज़ारों  साल  पहले घटी इस घटना को काल्पनिक चाहे कह दिया जाए किंतु , उत्सव वट वृक्ष की पूजा और आनंद के इन क्षणों को खुलकर जिया जाए!

इस व्रत में छिपे पर्यावरण और दीर्घायु के रहस्य पर चर्चा बाद में करेंगे।

आज तो धन्य है भारत भूमि जहाँ सावित्री का जन्म हुआ, वो खेली बड़ी हुई और मृत्यु को पराजित किया।
(इस अप्रतिम वनिता कासनियां पंजाब लेखक को नमन)
बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम  की वाल से

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

   बलुवाना न्यूज पंजाब 7 किलो चूरा पोस्त सहित ड्राईवर-कंडक्टर काबू अबोहर, 20 दिसंबर (बलुवाना न्यूज पंजाब):  फिरोजपुर के डीआईजी रणजीत सिंह, फाजिल्का के एसएसपी भूपिंद्र सिंह के दिशा निर्देशों पर एसपीडी गुरविंद्र सिंह संघा,  डीएसपी बल्लुआना विभोर शर्मा, डीएसपी अबोहर सुखविंद्र सिंह बराड़ द्वारा जिले को नशामुक्त करने तथा असामाजिक तत्वों के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत उनके दिशा निर्देशों का पालन करते हुए थाना सदर के प्रभारी इकबाल सिंह, एएसआई गुरमेल सिंह, जसविंद्र सिंह दौराने गश्त सैयदांवाली के निकट नाकाबंदी कर रखी थी कि सामने से एक कैंटर पीबी 10एचजी 2717 आता दिखाई दिया। शक के आधार पर कैंटर को रोककर तलाशी ली तो उसमें से 7 किलो चूरा पोस्त बरामद हुई। पकड़े गए आरोपी की पहचान हरमनजीत सिंह व जतिंद्रपाल सिंह पुत्रान कुलदीप सिंह वासी चिमना थाना सदर जगरावां जिला लुधियाना देहाती के रूप में हुई। दोनों आरोपियों के खिलाफ सदर थाना अबोहर में मामला दर्ज किया गया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। फोटो: 1, जानकारी देती पुलिस, पकड़े गए आरोपी व बरामद कैंटर baluw...

❁══❁❁═ ══❁❁══❁❁ राधे माला किर्तन पोस्ट ❁❁══❁❁═ ══❁❁══❁हे कृष्ण🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏सुना है , आँखों मे तेरी , प्रेम समन्दर बसते हैं । फिर भी हम, एक बून्द , पानी को तरसते हैं ।🌹मिटा दो , जन्मों जन्मों की प्यास , साँवरे। 💐🪻प्रेम उत्सव मे बीत जाये , जीवन डगर प्यारे।🌹🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।भक्तो की तुमने विपदा टारी मुझे भी आके थाम मुरलीवाले।।🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷विघ्न बनाये तुमने, कर पार मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा।सुन ले पुकार कान्हा, बस एक बार आजा।बैचैन मन के तुम ही, आराम मुरली वाले॥💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥तुम हो दया के सागर, जनमों की मैं हूँ प्यासी।दे दो जगह मुझे भी, चरणों में बस ज़रा सी।सुबह तुम ही हो, तुम ही, मेरी शाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿रूप सलोना देख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली।।🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻सखी पनघट पर यमुना के तट पर,लेकर पहुंची मटकी,भूल गई सब एक बार जब,छवि देखि नटखट की,देखत ही मैं हुई बाँवरी,उसी रूप में खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁कदम के नीचे अखियाँ मीचे,खड़ा था नन्द का लाला,मुख पर हंसी हाथ में बंसी,मोर मुकुट गल माला,तान सुरीली मधुर नशीली,तन मन दियो भिगोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹सास ननन्द मोहे पल-पल कोसे,हर कोई देवे ताने,बीत रही क्या मुझ बिरहन पर,ये कोई नहीं जाने,पूछे सब निर्दोष बावरी,तट पर काहे गई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺रूप सलोना देख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली।।#Vnitaराधे राधे 🌲🙏🌲🙏🌲🙏🌲🙏🌲#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #टीम #द्वारका जी जाते हुए ◢█◈★◈■⚀■◈★◈█◣GOOD MORNING DOS ⫷▓▓▓(✴ ✴)▓▓▓ ◥█◈★◈■⚀■◈★◈ ██ ◥◤★ 💕कुछ गहरा सा लिखना था___❦︎ इश्क से ज्यादा क्या लिखूं,❦︎❣︎_____सुनो अब #जिंदगी _लिखनी है___ #तुमसे_ज्यादा क्या लिखूं..!! 🍒🌷 नस_नस मे #नशा है ते हर #सांस को तेरी ही #तलब है, ऐसे मे 🥰 अब दूर कैसे रहूँ #तुझसे तू ही #इश्क मेरा, 🥰तू ही #मोहब्बत है।❣️💞तोड़ दूँ.....सारी 🥰 “बंदिशें और 😘 तुझसे लिपट......जाऊं..!❣️💞💖सुन.....लूँ तेरी “धड़कन“🥰 और....तेरी 😘बाहों में सिमट जाऊं..!💞💞❣️छू लूँ🥰 मेरे “सांसो“ से..... तेरे “सांसो तेरी...... हर सांस में घुल 😘जाऊं..!💞 💞💖तेरे 🥰 "दिल" में... उतर कर, तेरी.... "रूह" से मिल 😘जाऊं..!!💞 #Vnita 🖤♦️━━•❣️•✮✮┼ ◢ ▇ ◣ ♥️ ◢ ▇ ▇ ▇ ▇ ◣ ◢ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ▇ ▇ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ◥ ╔══❤️═ ♥️ #कान्हा ╚══❤️═राधे रादेधे═╝♥️═╗ ◤ ◤ ◤ ◤ ▇ ◣┼✮┼✮━━♦️💖🖤💖 ❣️“ को,💖 को,💞“💖 मै,💖रा 💖🍒🌷💖❣︎◥◤◥◤ ██████◤⫸ TO

 ❁══❁❁═ ══❁❁══❁ ❁ राधे माला किर्तन पोस्ट ❁ ❁══❁❁═ ══❁❁══❁ हे कृष्ण🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 सुना है , आँखों मे तेरी , प्रेम समन्दर बसते हैं ।   फिर भी हम, एक बून्द , पानी को तरसते हैं ।🌹 मिटा दो , जन्मों जन्मों की प्यास , साँवरे। 💐🪻 प्रेम उत्सव मे बीत जाये , जीवन डगर प्यारे।🌹 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴 मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। भक्तो की तुमने विपदा टारी मुझे भी आके थाम मुरलीवाले।। 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷 विघ्न बनाये तुमने, कर पार मुरली वाले॥ मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा। सुन ले पुकार कान्हा, बस एक बार आजा। बैचैन मन के तुम ही, आराम मुरली वाले॥ 💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦 मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले। मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥ 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 तुम हो दया के सागर, जनमों की मैं हूँ प्यासी। दे दो जगह मुझे भी, चरणों में बस ज़रा सी। सुबह तुम ही ...

कभी विष्णु कभी शिव बन भक्त को छकाते भगवान भक्तों को आनन्द और शिक्षा देने के लिए होती है भगवान की लीला!!!!!!! By वनिता कासनियां पंजाब ?तीन बार ऐसा हुआ कि नरहरि सुनार को आंखें बंद करने पर शंकर और आंखें खोलने पर विट्ठल भगवान के दर्शन होते थे । तब नरहरि सुनार को आत्मबोध हुआ कि जो शंकर हैं, वे ही विट्ठल (विष्णु) हैं और जो विट्ठल हैं, वे ही शंकर हैं, दोनों एक ही हरिहर हैं । भगवान शिव और विष्णु की एकता दर्शाती एक मनोरंजक भक्ति कथा,,,,,,इस कथा को लिखने का उद्देश्य पाठकों को यह बताना है कि भगवान विष्णु और शंकर में कोई भेद नहीं है, दोनों एक ही हैं । भगवान शंकर और विष्णु वास्तव में दो घड़ों में रखे हुए जल की भांति हैं । जल एक ही है, सिर्फ घड़े दो हैं । इसी भाव को लोगों तक पहुंचाने के लिए भगवान शंकर ने अपने भक्त नरहरि सुनार के साथ एक लीला की । भगवान जब कोई लीला करते हैं तो उसके पीछे कोई महान शिक्षा या आदर्श छिपा रहता है और भक्तों को उससे आनन्द मिलता है ।नरहरि सुनार : शिव भक्त पर विष्णु द्रोहीपुराने समय में पण्ढरपुर में नरहरि सुनार नाम के ऐसे शिव भक्त हुए जिन्होंने पण्ढरपुर में रहकर भी कभी पण्ढरीनाथ श्रीपाण्डुरंग के दर्शन नहीं किए । उनकी ऐसी विलक्षण शिवभक्ति थी । लेकिन भगवान को जिसे अपने दर्शन देने होते हैं, वे कोई-न-कोई लीला रच ही देते हैं ।भगवान की लीला से एक व्यक्ति इन्हें श्रीविट्ठल (भगवान विष्णु) की कमर की करधनी बनाने के लिए सोना दे गया और उसने भगवान की कमर का नाप बता दिया । नरहरि ने करधनी तैयार की, पर जब वह भगवान को पहनाई गयी तो वह चार अंगुल बड़ी हो गयी । उस व्यक्ति ने नरहरि से करधनी को चार अंगुल छोटा करने को कहा । करधनी सही करके जब दुबारा श्रीविट्ठल को पहनाई गयी तो वह इस बार चार अंगुल छोटी निकली । फिर करधनी चार अंगुल बड़ी की गयी तो वह भगवान को चार अंगुल बड़ी हो गयी । फिर छोटी की गयी तो वह चार अंगुल छोटी हो गयी । इस तरह करधनी को चार बार छोटा-बड़ा किया गया ।आंखों पर पट्टी बांधकर नरहरि ने लिया भगवान का नाप!!!!!!लाचार होकर नरहरि सुनार ने स्वयं चलकर श्रीविट्ठल का नाप लेने का निश्चय किया । पर कहीं भगवान के दर्शन न हो जाएं, इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली । हाथ बढ़ाकर जो वह मूर्ति की कमर टटोलने लगे तो उनके हाथों को पांच मुख, दस हाथ, सर्प के आभूषण, मस्तक पर जटा और जटा में गंगा—इस तरह की शिवजी की मूर्ति का अहसास हुआ । उनको विश्वास हो गया कि ये तो उनके आराध्य भगवान शंकर ही हैं ।उन्होंने अपनी आंखों की पट्टी खोल दी और ज्यों ही मूर्ति को देखा तो उन्हें श्रीविट्ठल के दर्शन हुए । फिर आंखें बंद करके मूर्ति को टटोला तो उन्हें पंचमुख, चन्द्रशेखर, गंगाधर, नागेन्द्रहाराय श्रीशंकर का स्वरूप प्रतीत हुआ।आंखें बंद करने पर शंकर, आंखें खोलने पर विट्ठल!!!!!!!तीन बार ऐसा हुआ कि आंखें बंद करने पर शंकर और आंखें खोलने पर नरहरि सुनार को विट्ठल भगवान के दर्शन होते थे । तब नरहरि सुनार को आत्मबोध हुआ कि जो शंकर हैं, वे ही विट्ठल (विष्णु) हैं और जो विट्ठल हैं, वे ही शंकर हैं, दोनों एक ही हरिहर हैं ।अभी तक उनकी जो भगवान शंकर और विष्णु में भेदबुद्धि थी, वह दूर हो गयी और उनका दृष्टिकोण व्यापक हो गया । अब वे भगवान विट्ठल के भक्तों के ‘बारकरी मण्डल’ में शामिल हो गए । सुनार का व्यवसाय करते हुए हुए भी इन्होंने अभंग (भगवान विट्ठल या बिठोवा की स्तुति में गाए गए छन्द) की रचना की । इनके एक अभंग का भाव कितना सुन्दर है—‘भगवन् ! मैं आपका एक सुनार हूँ, आपके नाम का व्यवहार (व्यवसाय) करता हूँ । यह गले का हार देह है, इसका अन्तरात्मा सोना है। त्रिगुण का सांचा बनाकर उसमें ब्रह्मरस भर दिया । विवेक का हथौड़ा लेकर उससे काम-क्रोध को चूर किया और मनबुद्धि की कैंची से राम-नाम बराबर चुराता रहा । ज्ञान के कांटे से दोनों अक्षरों को तौला और थैली में रखकर थैली कंधे पर उठाए रास्ता पार कर गया। यह नरहरि सुनार, हे हरि ! तेरा दास है, रातदिन तेरा ही भजन करता है ।’शिव-द्रोही वैष्णवों को और विष्णु-द्वेषी शैवों को इस कथा से सीख लेनी चाहिए ।पद्मपुराण पा ११४।१९२ में भगवान शंकर विष्णुजी से कहते हैं—न त्वया सदृशो मह्यं प्रियोऽस्ति भगवन् हरे ।पार्वती वा त्वया तुल्या न चान्यो विद्यते मम ।।अर्थात्—औरों की तो बात ही क्या, पार्वती भी मुझे आपके समान प्रिय नहीं है ।इस पर भगवान विष्णु ने कहा—‘शिवजी मेरे सबसे प्रिय हैं, वे जिस पर कृपा नहीं करते उसे मेरी भक्ति प्राप्त नहीं होती है ।’कूर्मपुराण में ब्रह्माजी ने कहा है—‘जो लोग भगवान विष्णु को शिवशंकर से अलग मानते हैं, वे मनुष्य नरक के भागी होते हैं ।’* सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा॥संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी॥भावार्थ:- जो शिव से द्रोह रखता है और मेरा भक्त कहलाता है, वह मनुष्य स्वप्न में भी मुझे नहीं पाता। शंकरजी से विमुख होकर (विरोध करके) जो मेरी भक्ति चाहता है, वह नरकगामी, मूर्ख और अल्पबुद्धि है॥* संकरप्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।ते नर करहिं कलप भरि घोर नरक महुँ बास॥भावार्थ:- जिनको शंकरजी प्रिय हैं, परन्तु जो मेरे द्रोही हैं एवं जो शिवजी के द्रोही हैं और मेरे दास (बनना चाहते) हैं, वे मनुष्य कल्पभर घोर नरक में निवास करते हैं॥

कभी विष्णु कभी शिव बन भक्त को छकाते भगवान भक्तों को आनन्द और शिक्षा देने के लिए होती है भगवान की लीला!!!!!!! By  वनिता कासनियां पंजाब  ? तीन बार ऐसा हुआ कि नरहरि सुनार को आंखें बंद करने पर शंकर और आंखें खोलने पर विट्ठल भगवान के दर्शन होते थे । तब नरहरि सुनार को आत्मबोध हुआ कि जो शंकर हैं, वे ही विट्ठल (विष्णु) हैं और जो विट्ठल हैं, वे ही शंकर हैं, दोनों एक ही हरिहर हैं । भगवान शिव और विष्णु की एकता दर्शाती एक मनोरंजक भक्ति कथा,,,,,, इस कथा को लिखने का उद्देश्य पाठकों को यह बताना है कि भगवान विष्णु और शंकर में कोई भेद नहीं है, दोनों एक ही हैं । भगवान शंकर और विष्णु वास्तव में दो घड़ों में रखे हुए जल की भांति हैं । जल एक ही है, सिर्फ घड़े दो हैं । इसी भाव को लोगों तक पहुंचाने के लिए भगवान शंकर ने अपने भक्त नरहरि सुनार के साथ एक लीला की । भगवान जब कोई लीला करते हैं तो उसके पीछे कोई महान शिक्षा या आदर्श छिपा रहता है और भक्तों को उससे आनन्द मिलता है । नरहरि सुनार : शिव भक्त पर विष्णु द्रोही पुराने समय में पण्ढरपुर में नरहरि सुनार नाम के ऐसे शिव भक्त हुए जिन्होंने पण्ढरपुर में रहकर ...