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*एक अनोखे प्रेम का संबंध**एक बार एक चिड़िया का बच्चा आकाश में उड़ता हुआ अचानक किसी घर के आंगन में पड़ा दाना देख कर उसे चुगने के लिए वहां पर जा पहुंचा। जब वह दाना चुग कर वापिस आकाश में उड़ने लगा तो ना जाने कैसे वह उस घर के एक कमरे के दरवाजे से उसमें जा घुसा। कमरे में घुसकर उसे कमरे से बाहर जाने का रास्ता भूल गया और वह घबरा कर कमरे में ही कभी इधर तो कभी उधर भटकने लगा। कभी वह कमरे के एक छोर पर मौजूद जालीदार खिड़की से चहकता हुआ बाहर जाने की कोशिश करता तो कभी दूसरे छोर की खिड़की से, जब वह थक जाता तो पंखे पर जाकर बैठ जाता। परंतु किसी भी हाल में वह अपने बाहर जाने का रास्ता नहीं ढूंढ पाया।**अंत में जब उस चिड़िया के बच्चे की मां उसे ढूंढती हुई उस घर में पहुंची तो उसने खिड़की से अपने बच्चे को तड़पते हुए उस कमरे से बाहर आने की कोशिश करते हुए देखा। यह सब देख कर उसकी मां ने अपने बच्चे की मदद करनी चाही। उसने खिड़की के अंदर से देख रहे आपने बच्चे को आवाज देकर कहा कि "बच्चे अब तुम घबराओ नही क्योंकि अब मैं आ गई हूं और मैं यहां से तुम्हें बाहर निकलने में तुम्हारी पूरी मदद करूंगी।" ऐसा कह कर उसकी मां ने खुद यह निर्णय किया कि वह उस कमरे में जाकर अपने बच्चे को बाहर लेकर आएगी। उसकी मां कमरे में दरवाजे के रास्ते से घुसी और उस कमरे के पंखे पर जा बैठी फिर जैसे ही वह बच्चा अपनी मां को पंखे पर बैठा देख कर अपनी मां के पास आकर बैठा तो उसकी मां उस कमरे के दरवाजे से बाहर की ओर उड़ गई और पीछे-पीछे उसका बच्चा भी उड़कर उस कमरे से बाहर आ गया और दोनों खुशी-खुशी अपने घर की और लौट गए।**मित्रों यह कहानी केवल चिड़िया और उसके बच्चे की ही नहीं थी बल्कि हमारी और हमारे पिता परमेश्वर की भी है। हम सब भी अपने पिता के ऐसे ही नादान बच्चे हैं जो इस संसार रुपी कमरे में आकर कैद हो चुके हैं और अब इससे बाहर निकलने का रास्ता भूल चुके हैं। परंतु हमारे पिता के साथ हमारा एक अनोखे प्रेम का संबंध है। जिसके चलते वह हमें इस संसार रुपी कमरे की कैद से बाहर निकालने में हमारी मदद करने के लिए आते हैं। भगवान श्री कृष्ण गीता में अर्जुन से यह कहते हैं कि "हे अर्जुन! अपने भक्तो का उद्धार करने, दुष्टों का संहार करने तथा धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूं।"**जब कभी भी प्राणी इस संसार रुपी कमरे में आकर फंस जाते हैं और बहुत दुखी हो जाते हैं तो भगवान इस धरती पर अवतरित होकर अपने बच्चों को इस संसार रुपी कैद से मुक्त होने में उनकी मदद करने के लिए अवश्य आते हैं। जो बच्चे पूरी लगन और मेहनत के साथ अपने पिता द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते हैं वह शीघ्र ही इस संसार रुपी कैद से स्वतंत्र हो जाते हैं और सदा के लिए अपने पिता के साथ उनके धाम में निवास करते हैं। इसी को यहां पर "एक अनोखे प्रेम के संबंध" का नाम दिया गया है क्योंकि इस संबंध में एक पिता और एक पुत्र का आपसी गहरा प्रेम समाहित है।*#वनिता #कासनियां #पंजाब ❤️राधे राधे ❤️*कान्हा दीवानी*

*एक अनोखे प्रेम का संबंध*

*एक बार एक चिड़िया का बच्चा आकाश में उड़ता हुआ अचानक किसी घर के आंगन में पड़ा दाना देख कर उसे चुगने के लिए वहां पर जा पहुंचा। जब वह दाना चुग कर वापिस आकाश में उड़ने लगा तो ना जाने कैसे वह उस घर के एक कमरे के दरवाजे से उसमें जा घुसा। कमरे में घुसकर उसे कमरे से बाहर जाने का रास्ता भूल गया और वह घबरा कर कमरे में ही कभी इधर तो कभी उधर भटकने लगा। कभी वह कमरे के एक छोर पर मौजूद जालीदार खिड़की से चहकता हुआ बाहर जाने की कोशिश करता तो कभी दूसरे छोर की खिड़की से, जब वह थक जाता तो पंखे पर जाकर बैठ जाता। परंतु किसी भी हाल में वह अपने बाहर जाने का रास्ता नहीं ढूंढ पाया।*
*अंत में जब उस चिड़िया के बच्चे की मां उसे ढूंढती हुई उस घर में पहुंची तो उसने खिड़की से अपने बच्चे को तड़पते हुए उस कमरे से बाहर आने की कोशिश करते हुए देखा। यह सब देख कर उसकी मां ने अपने बच्चे की मदद करनी चाही। उसने खिड़की के अंदर से देख रहे आपने बच्चे को आवाज देकर कहा कि "बच्चे अब तुम घबराओ नही क्योंकि अब मैं आ गई हूं और मैं यहां से तुम्हें बाहर निकलने में तुम्हारी पूरी मदद करूंगी।" ऐसा कह कर उसकी मां ने खुद यह निर्णय किया कि वह उस कमरे में जाकर अपने बच्चे को बाहर लेकर आएगी। उसकी मां कमरे में दरवाजे के रास्ते से घुसी और उस कमरे के पंखे पर जा बैठी फिर जैसे ही वह बच्चा अपनी मां को पंखे पर बैठा देख कर अपनी मां के पास आकर बैठा तो उसकी मां उस कमरे के दरवाजे से बाहर की ओर उड़ गई और पीछे-पीछे उसका बच्चा भी उड़कर उस कमरे से बाहर आ गया और दोनों खुशी-खुशी अपने घर की और लौट गए।*

*मित्रों यह कहानी केवल चिड़िया और उसके बच्चे की ही नहीं थी बल्कि हमारी और हमारे पिता परमेश्वर की भी है। हम सब भी अपने पिता के ऐसे ही नादान बच्चे हैं जो इस संसार रुपी कमरे में आकर कैद हो चुके हैं और अब इससे बाहर निकलने का रास्ता भूल चुके हैं। परंतु हमारे पिता के साथ हमारा एक अनोखे प्रेम का संबंध है। जिसके चलते वह हमें इस संसार रुपी कमरे की कैद से बाहर निकालने में हमारी मदद करने के लिए आते हैं। भगवान श्री कृष्ण गीता में अर्जुन से यह कहते हैं कि "हे अर्जुन! अपने भक्तो का उद्धार करने, दुष्टों का संहार करने तथा धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूं।"*

*जब कभी भी प्राणी इस संसार रुपी कमरे में आकर फंस जाते हैं और बहुत दुखी हो जाते हैं तो भगवान इस धरती पर अवतरित होकर अपने बच्चों को इस संसार रुपी कैद से मुक्त होने में उनकी मदद करने के लिए अवश्य आते हैं। जो बच्चे पूरी लगन और मेहनत के साथ अपने पिता द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते हैं वह शीघ्र ही इस संसार रुपी कैद से स्वतंत्र हो जाते हैं और सदा के लिए अपने पिता के साथ उनके धाम में निवास करते हैं। इसी को यहां पर "एक अनोखे प्रेम के संबंध" का नाम दिया गया है क्योंकि इस संबंध में एक पिता और एक पुत्र का आपसी गहरा प्रेम समाहित है।*
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*कान्हा दीवानी*

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❁══❁❁═ ══❁❁══❁❁ राधे माला किर्तन पोस्ट ❁❁══❁❁═ ══❁❁══❁हे कृष्ण🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏सुना है , आँखों मे तेरी , प्रेम समन्दर बसते हैं । फिर भी हम, एक बून्द , पानी को तरसते हैं ।🌹मिटा दो , जन्मों जन्मों की प्यास , साँवरे। 💐🪻प्रेम उत्सव मे बीत जाये , जीवन डगर प्यारे।🌹🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।भक्तो की तुमने विपदा टारी मुझे भी आके थाम मुरलीवाले।।🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷विघ्न बनाये तुमने, कर पार मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸पतझड़ है मेरा जीवन, बन के बहार आजा।सुन ले पुकार कान्हा, बस एक बार आजा।बैचैन मन के तुम ही, आराम मुरली वाले॥💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥तुम हो दया के सागर, जनमों की मैं हूँ प्यासी।दे दो जगह मुझे भी, चरणों में बस ज़रा सी।सुबह तुम ही हो, तुम ही, मेरी शाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले।मेरी सांस सांस में तेरा, है नाम मुरली वाले॥मुझे चरणों से लगा ले, मेरे श्याम मुरली वाले🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿रूप सलोना देख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली।।🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻सखी पनघट पर यमुना के तट पर,लेकर पहुंची मटकी,भूल गई सब एक बार जब,छवि देखि नटखट की,देखत ही मैं हुई बाँवरी,उसी रूप में खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁कदम के नीचे अखियाँ मीचे,खड़ा था नन्द का लाला,मुख पर हंसी हाथ में बंसी,मोर मुकुट गल माला,तान सुरीली मधुर नशीली,तन मन दियो भिगोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹सास ननन्द मोहे पल-पल कोसे,हर कोई देवे ताने,बीत रही क्या मुझ बिरहन पर,ये कोई नहीं जाने,पूछे सब निर्दोष बावरी,तट पर काहे गई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️रूप सलोना दैख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई।।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺रूप सलोना देख श्याम का,सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई,नी मैं कमली होई,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली।।#Vnitaराधे राधे 🌲🙏🌲🙏🌲🙏🌲🙏🌲#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #टीम #द्वारका जी जाते हुए ◢█◈★◈■⚀■◈★◈█◣GOOD MORNING DOS ⫷▓▓▓(✴ ✴)▓▓▓ ◥█◈★◈■⚀■◈★◈ ██ ◥◤★ 💕कुछ गहरा सा लिखना था___❦︎ इश्क से ज्यादा क्या लिखूं,❦︎❣︎_____सुनो अब #जिंदगी _लिखनी है___ #तुमसे_ज्यादा क्या लिखूं..!! 🍒🌷 नस_नस मे #नशा है ते हर #सांस को तेरी ही #तलब है, ऐसे मे 🥰 अब दूर कैसे रहूँ #तुझसे तू ही #इश्क मेरा, 🥰तू ही #मोहब्बत है।❣️💞तोड़ दूँ.....सारी 🥰 “बंदिशें और 😘 तुझसे लिपट......जाऊं..!❣️💞💖सुन.....लूँ तेरी “धड़कन“🥰 और....तेरी 😘बाहों में सिमट जाऊं..!💞💞❣️छू लूँ🥰 मेरे “सांसो“ से..... तेरे “सांसो तेरी...... हर सांस में घुल 😘जाऊं..!💞 💞💖तेरे 🥰 "दिल" में... उतर कर, तेरी.... "रूह" से मिल 😘जाऊं..!!💞 #Vnita 🖤♦️━━•❣️•✮✮┼ ◢ ▇ ◣ ♥️ ◢ ▇ ▇ ▇ ▇ ◣ ◢ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ▇ ▇ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ▇ ▇ ◥ ▇ ▇ ◥ ╔══❤️═ ♥️ #कान्हा ╚══❤️═राधे रादेधे═╝♥️═╗ ◤ ◤ ◤ ◤ ▇ ◣┼✮┼✮━━♦️💖🖤💖 ❣️“ को,💖 को,💞“💖 मै,💖रा 💖🍒🌷💖❣︎◥◤◥◤ ██████◤⫸ TO

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नृसिंह जयंती सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएँ जय जय लक्ष्मी नारायण हरे.........#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान🙏🙏❤️नृसिंह जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस जयंती का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। भगवान श्रीनृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। पौराणिक धार्मिक मान्यताओं एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने 'नृसिंह अवतार' लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। भगवान विष्णु ने अधर्म के नाश के लिए कई अवतार लिए तथा धर्म की स्थापना की।कथा :-नृसिंह अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है। नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के इस अवतरण की कथा इस प्रकार है-प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि हुए थे, उनकी पत्नी का नाम दिति था। उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम 'हरिण्याक्ष' तथा दूसरे का 'हिरण्यकशिपु ' था।हिरण्याक्ष को भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह रूप धरकर मार दिया था। अपने भाई कि मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकशिपु ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया। सहस्त्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। लोकपालों को मारकर भगा दिया और स्वत: सम्पूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरूपाय हो गए थे। वह असुर हिरण्यकशिपु को किसी प्रकार से पराजित नहीं कर सकते थे।भक्त प्रह्लाद का जन्म :-अहंकार से युक्त हिरण्यकशिपु प्रजा पर अत्याचार करने लगा। इसी दौरान हिरण्यकशिपु कि पत्नीकयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम 'प्रह्लाद ' रखा गया। एक राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी प्रह्लाद में राक्षसों जैसे कोई भी दुर्गुण मौजूद नहीं थे तथा वह भगवान नारायण का भक्त था। वह अपने पिता हिरण्यकशिपु के अत्याचारों का विरोध करता था।हिरण्यकशिपु का वध :-भगवान-भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने और उसमें अपने जैसे दुर्गुण भरने के लिए हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयास किए। नीति-अनीति सभी का प्रयोग किया, किंतु प्रह्लाद अपने मार्ग से विचलित न हुआ। तब उसने प्रह्लाद को मारने के लिए षड्यंत्र रचे, किंतु वह सभी में असफल रहा। भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर संकट से उबर आता और बच जाता था। अपने सभी प्रयासों में असफल होने पर क्षुब्ध हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को अपनी बहनहोलिका की गोद में बैठाकर जिन्दा ही जलाने का प्रयास किया। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसे नहीं जला सकती, परंतु जब प्रह्लाद को होलिका की गोद में बिठा कर अग्नि में डाला गया तो उसमें होलिका तो जलकर राख हो गई, किंतु प्रह्लाद का बाल भी बाँका नहीं हुआ। इस घटना को देखकर हिरण्यकशिपु क्रोध से भर गया। उसकी प्रजा भी अब भगवान विष्णु की पूजा करने लगी थी। तब एक दिन हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा कि बता- "तेरा भगवान कहाँ है?" इस पर प्रह्लाद ने विनम्र भाव से कहा कि "प्रभु तो सर्वत्र हैं, हर जगह व्याप्त हैं।" क्रोधित हिरण्यकशिपु ने कहा कि "क्या तेरा भगवान इस स्तम्भ (खंभे) में भी है?" प्रह्लाद ने हाँ में उत्तर दिया। यह सुनकर क्रोधांध हिरण्यकशिपु ने खंभे पर प्रहार कर दिया। तभी खंभे को चीरकर श्रीनृसिंह भगवान प्रकट हो गए और हिरण्यकशिपु को पकड़कर अपनी जाँघों पर रखकर उसकी छाती को नखों से फाड़ डाला और उसका वध कर दिया। श्रीनृसिंह ने प्रह्लाद कीभक्ति से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि आज के दिन जो भी मेरा व्रत करेगा, वह समस्त सुखों का भागी होगा एवं पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त होगा। अत: इस कारण से इस दिन को "नृसिंह जयंती-उत्सव" के रूप में मनाया जाता है।नृसिंह भगवान के चर्म को बना लिया भोले ने अपना आसन :-इसके अलावा एक अन्य वजह भी है, जिसके लिए भगवान विष्णु ने ये रूप धरा। बताया जाता है कि हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद भगवान नृसिंह का क्रोध शांत ही नहीं हो रहा था। वे पृथ्वी को नष्ट कर देना चाहते हैं। इस बात से परेशान सभी देवता भोलेनाथ की शरण में गए। भोलेनाथ ने नरसिंह भगवान का गुस्सा शांत करने के लिए अपने अंश से उत्पन्न वीरभद्र को भेजा। वीरभ्रद ने काफी कोशिश की, लेकिन जब भगवान नृसिंह नहीं माने तो उन्होंने वीरभद्र गरूड़, सिंह और मनुष्य का मिश्रित शरभ रूप धारण किया।शरभ ने नृसिंह को अपने पंजे से उठा लिया और चोंच से वार करने लगा। शरभ के वार से आहत होकर नृसिंह ने अपना शरीर त्यागने का निर्णय लिया और शिव से निवेदन किया कि इनके चर्म को शिव अपने आसन के रूप में स्वीकार करें। इसके बाद शिव ने इनके चर्म को अपना आसन बना लिया। इसलिए शिव वाघ के खाल पर विराजते हैं। इस दिन जो भी व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है, उसे सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पाकर मोक्ष की भी प्राप्ति करता है। भगवान नृसिंह की पूजा के लिए फल, फूल और पंचमेवा का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए उनके नृसिंह गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।व्रत विधि :-नृसिंह जयंती के दिन व्रत-उपवास एवं पूजा-अर्चना कि जाती है। इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए तथा भगवान नृसिंह की विधी विधान के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए। भगवान नृसिंह तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति स्थापित करना चाहिए, तत्पश्चात् वेद मंत्रों से इनकी प्राण-प्रतिष्ठा कर षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। भगवान नृसिंह की पूजा के लिए फल , पुष्प , पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल , अक्षत व पीताम्बर रखना चाहिए। गंगाजल , काले तिल, पंच गव्य व हवन सामग्री का पूजन में उपयोग करें। भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए उनके नृसिंह गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। पूजा के पश्चात् एकांत में कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से नृसिंह भगवान के मंत्र का जप करना चाहिए। इस दिन व्रती को सामर्थ्य अनुसार तिल , स्वर्ण तथा वस्त्रादि का दान देना चाहिए। इस व्रत को करने वाला व्यक्ति लौकिक दुःखों से मुक्त हो जाता है। भगवान नृसिंह अपने भक्त की रक्षा करते हैं व उसकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।#Vnita🙏🙏❤️मंत्र :-नृसिंह #जयंती के दिन निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए-1. ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥2. ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः ।इन #मंत्रों का #जाप करने से समस्त #दुखों का निवारण होता है तथा #भगवान #नृसिंह की कृपा प्राप्त होती है।❤️ राधे राधे ❤️

नृसिंह जयंती सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएँ  जय जय लक्ष्मी नारायण हरे......... #बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान🙏🙏❤️ नृसिंह जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस जयंती का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। भगवान श्रीनृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। पौराणिक धार्मिक मान्यताओं एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने 'नृसिंह अवतार' लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। भगवान विष्णु ने अधर्म के नाश के लिए कई अवतार लिए तथा धर्म की स्थापना की। कथा :- नृसिंह अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है। नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के इस अवतरण की कथा इस प्रकार है- प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि हुए थे, उनकी पत्नी का नाम दिति था। उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम 'हरिण्याक्ष' तथा दूसरे का 'हिरण्यकशिपु ' था। हिरण्याक्ष...