सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

🦚❤️‼️🙏{{#जय_श्री.}} 🙏‼️❤️🦚🌷‼️-----♨️💓♨️------‼️🌷 (`“ •. (`“•.राधे🌷 राधे¸.•“´) ¸. •“´)❤️«"•🦚#राधा_माला_सकीर्तन_पोस्ट🦚•“»❤️ (¸. • “´(¸.•“´🌷 `“•)` “° •.¸,🌷#श्री_राधा_प्यारी_गुरूप ‼️🌷💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💕📿 राधा माला संकीर्तन पोस्ट📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕 राधे 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 राधे 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 💚♥️💚 सुप्रभात वंदन हरी चरणो में 💚♥️💚💞🌹राधे कृष्णा के भक्तो आए सभी राधा दरबार में सब मिलकर सकीर्तन करते हैं राधे राधे राधे राधे,,,🌹💞💚💚💚 !!!श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!! !! Զเधॆ Զเधॆ !! ‼जय श्री कृष्ण‼ ─╼⃝𖠁 🙏🏻💔श्री राधे💔🙏🏻 𖠁⃝╾─•* ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💚💚💚💚💚💚💚❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💚💚💚💚💚💚💚 ┈┉┅━☞🙏☜━┅┉┈ 💞🌸🌹🌸💞 🌹🌸🌸🌹 𝐉𝐚𝐢 𝐒𝐡𝐫𝐢 Radhey 𝐊𝐫𝐢𝐬𝐡𝐧𝐚 𝐣𝐢 ┊┊┊┊┊ ┊┊┊┊💚 राधे राधे ┊┊┊💚 राधे राधे राधे ┊┊💚 राधे राधे राधे राधे ┊💚 राधे राधे राधे राधे 💚 राधे राधे राधे राधे राधेश्याम तेरी बंसीपुकारे राधा नामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम 🌲🌲♥️💚♥️💚♥️💚♥️💚♥️🌲🌲श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नामश्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम🎋🎋💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🎋🎋सांवरे की बंसी को बजने से कामसांवरे की बंसी को बजने से कामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्यामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲ओ.. जमुना की लहरे बंसीबट की छैयाकिसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैयाजमुना की लहरे बंसीबट की छैया💛💛💛💛💛💚💚💚💚💚💚💛💛💛💛💛💛💚💚💚💚💚💚💛💛💛💛💛किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैयाश्याम का दीवाना तो सारा ब्रिज धामश्याम का दीवाना तो सारा ब्रिज धामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम🎋🎋💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🎋🎋सांवरे की बंसी को बजने से कामसांवरे की बंसी को बजने से काम,🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈 🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्यामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲💛💛💛ओ.. कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाएजिसके मन भाए ये उसी के गुण गाए🌲🌲💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🌲🌲कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाएजिसके मन भाए वो उसी के गुण गाए💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥कौन नहीं कौन नहीं बंसी की धुन का गुलामराधा का भी श्याम हो तो मीरा का भी श्याम🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नामश्याम तेरी बंसी कन्हैया तेरी बंसी पुकारे राधा नामलोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्यामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!! 🙏🙏 🌷!! Զเधॆ Զเधॆ !!🌷 ‼जय श्री कृष्ण‼ *•─╼⃝𖠁 ❤️❤️❤️ श्री राधे ❤️❤️❤️ 𖠁⃝╾─•* *मेरी हर बात शुरू होती है वहाँ से* *तेरे होने का एहसास हो जहां से**•─╼⃝𖠁 💚💚💚श्री राधे 💚💚💚 𖠁⃝╾─•* ༆∴━━━✿राधे✿राधे✿━━━∴༆ ╭•┄┅═❁✿❁🦚❁✿❁═┅┄•╮ 💥❁🌹*Զเधे💓Զเधे*🌹❁💥 ╰•┄┅═❁✿❁🦚❁✿❁═┅┄•🌹❤️🙏 वनिता कासनियां पंजाब.......✍️╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗ 🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝ ।। मंगलमय सुप्रभात ।। 🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,**हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!**༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻* राधा के हृदय मे कृष्ण राधा के सांसो मे श्री कृष्ण राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण* *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* जय श्री कृष्ण. * _Զเधे_Զเधे _**♕║♕ Զเधे ஜ۩۞۩ஜ Զเधे ♕║♕*मेरे बांके बिहारी जी मत छोड़ना मुझे बीच राह मे ..मैंने सब कुछ गिरवी रखा है सिर्फ तेरी चाह मे..श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास💕💕╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗ 🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝ ।। मंगलमय सुप्रभात ।। 🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,**हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!**༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻* राधा के हृदय मे कृष्ण राधा के सांसो मे श्री कृष्ण राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण* *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* जय श्री कृष्ण. * _Զเधे_Զเधे _**♕║♕ Զเधे ஜ۩۞۩ஜ Զเधे ♕║♕*

🦚❤️‼️🙏{{#जय_श्री.}} 🙏‼️❤️🦚
🌷‼️-----♨️💓♨️------‼️🌷
  (`“ •. (`“•.राधे🌷 राधे¸.•“´) ¸. •“´)
❤️«"•🦚#राधा_माला_सकीर्तन_पोस्ट🦚•“»❤️
        (¸. • “´(¸.•“´🌷 `“•)` “° •.¸,
🌷#श्री_राधा_प्यारी_गुरूप ‼️🌷
💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙💛💙
💕📿 राधा माला संकीर्तन पोस्ट📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕📿💕💕
        राधे 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 राधे
                                                  🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
      💚♥️💚 सुप्रभात वंदन हरी चरणो में 💚♥️💚
💞🌹राधे कृष्णा के भक्तो आए सभी राधा दरबार में सब मिलकर सकीर्तन करते हैं राधे राधे राधे राधे,,,🌹💞
💚💚💚
               !!!श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!
      !! Զเधॆ Զเधॆ !!
  ‼जय श्री कृष्ण‼
                             
─╼⃝𖠁 🙏🏻💔श्री राधे💔🙏🏻 𖠁⃝╾─•*
 ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💚💚💚💚💚💚💚❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💚💚💚💚💚💚💚
 ┈┉┅━☞🙏☜━┅┉┈
       💞🌸🌹🌸💞
          🌹🌸🌸🌹
   𝐉𝐚𝐢 𝐒𝐡𝐫𝐢 Radhey 𝐊𝐫𝐢𝐬𝐡𝐧𝐚 𝐣𝐢 
   ┊┊┊┊┊      
   ┊┊┊┊💚 राधे राधे
   ┊┊┊💚 राधे राधे राधे   
   ┊┊💚 राधे राधे राधे राधे         
   ┊💚 राधे राधे राधे राधे       
   💚 राधे राधे राधे राधे राधे
श्याम तेरी बंसी
पुकारे राधा नाम
लोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम 
🌲🌲♥️💚♥️💚♥️💚♥️💚♥️🌲🌲
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम
लोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम
🎋🎋💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🎋🎋
सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 
🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲
ओ.. जमुना की लहरे बंसीबट की छैया
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
जमुना की लहरे बंसीबट की छैया
💛💛💛💛💛💚💚💚💚💚💚💛💛💛💛💛💛💚💚💚💚💚💚💛💛💛💛💛
किसका नहीं है कहो कृष्ण कन्हैया
श्याम का दीवाना तो सारा ब्रिज धाम
श्याम का दीवाना तो सारा ब्रिज धाम
लोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम
🎋🎋💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🎋🎋
सांवरे की बंसी को बजने से काम
सांवरे की बंसी को बजने से काम,
🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈 🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈🌀🌈
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 
🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲
💛💛💛ओ.. कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाए ये उसी के गुण गाए
🌲🌲💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞🌲🌲
कौन जाने बांसुरिया किसको बुलाए
जिसके मन भाए वो उसी के गुण गाए
💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥
कौन नहीं कौन नहीं बंसी की धुन का गुलाम
राधा का भी श्याम हो तो मीरा का भी श्याम
🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
श्याम तेरी बंसी कन्हैया तेरी बंसी पुकारे राधा नाम
लोग करे मीरा को यूँ ही बदनाम
💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम
राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम 
🌲🌲💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛💚💛🌲🌲
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!! 🙏🙏
             🌷!! Զเधॆ Զเधॆ !!🌷
                ‼जय श्री कृष्ण‼                            

*•─╼⃝𖠁 ❤️❤️❤️ श्री राधे ❤️❤️❤️ 𖠁⃝╾─•*
          *मेरी हर बात शुरू होती है वहाँ से*
          *तेरे होने का एहसास हो जहां से*
*•─╼⃝𖠁 💚💚💚श्री राधे 💚💚💚 𖠁⃝╾─•*
        ༆∴━━━✿राधे✿राधे✿━━━∴༆
        ╭•┄┅═❁✿❁🦚❁✿❁═┅┄•╮
         💥❁🌹*Զเधे💓Զเधे*🌹❁💥
        ╰•┄┅═❁✿❁🦚❁✿❁═┅┄•
🌹❤️🙏 वनिता कासनियां पंजाब.......✍️
╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗ 
    🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹
╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝ 
        ।। मंगलमय सुप्रभात ।।
       🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸
*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,*
*हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!*
*༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻*

     राधा के हृदय मे कृष्ण 
  राधा के सांसो मे श्री कृष्ण 
 राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए 
    दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण*
     *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!*   
 *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।*
 *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।*
                  जय श्री कृष्ण
. * _Զเधे_Զเधे _*
*♕║♕ Զเधे ஜ۩۞۩ஜ Զเधे ♕║♕*
मेरे बांके बिहारी जी  
मत छोड़ना मुझे बीच राह मे ..
मैंने सब कुछ गिरवी रखा है सिर्फ तेरी चाह मे..
श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास💕💕
╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗ 
    🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹
╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝ 
        ।। मंगलमय सुप्रभात ।।
       🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸
*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,*
*हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!*
*༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻*

     राधा के हृदय मे कृष्ण 
  राधा के सांसो मे श्री कृष्ण 
 राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए 
    दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण*
     *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!*   
 *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।*
 *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।*
                  जय श्री कृष्ण
. * _Զเधे_Զเधे _*
*♕║♕ Զเधे ஜ۩۞۩ஜ Զเधे ♕║♕*

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗ 🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝ ।। मंगलमय सुप्रभात ।। 🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸*श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,**हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!**༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻* राधा के हृदय मे कृष्ण राधा के सांसो मे श्री कृष्ण राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण* *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* जय श्री कृष्ण. * _Զเधे_Զเधे _**♕║♕ Զเधे ஜ۩۞۩ஜ Զเधे ♕║♕*

╔══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╗      🌹•❀•#Զเधॆ_Զเधॆ•❀•🌹 ╚══•✥✥🌹ॐ🌹✥✥•══╝          ।। मंगलमय सुप्रभात ।।        🔸श्री कृष्ण शरणं ममः🔸 *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* *༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻*      राधा के हृदय मे कृष्ण    राधा के सांसो मे श्री कृष्ण   राधा मे ही है श्रीकृष्ण इसलिए      दुनिया कहती *राधे कृष्ण* *राधे कृष्ण*      *!! 卐 Զเधे_Զเधे 卐 ‌!!*     *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।*  *श्रीकृष्ण: शरणं मम:, श्रीकृष्ण: शरणं मम:।* 🌹🌹*जयश्रीकृष्ण *🌹🌹    *꧁!! Զเधॆ Զเधॆ !!꧂*            🌾सुप्रभात🌾   *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,*     *हे नाथ नारायण वासुदेवा*.    अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ॥               ((( श्री)))     *꧁!! ...

नृसिंह जयंती सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएँ जय जय लक्ष्मी नारायण हरे.........#बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान🙏🙏❤️नृसिंह जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस जयंती का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। भगवान श्रीनृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। पौराणिक धार्मिक मान्यताओं एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने 'नृसिंह अवतार' लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। भगवान विष्णु ने अधर्म के नाश के लिए कई अवतार लिए तथा धर्म की स्थापना की।कथा :-नृसिंह अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है। नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के इस अवतरण की कथा इस प्रकार है-प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि हुए थे, उनकी पत्नी का नाम दिति था। उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम 'हरिण्याक्ष' तथा दूसरे का 'हिरण्यकशिपु ' था।हिरण्याक्ष को भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह रूप धरकर मार दिया था। अपने भाई कि मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकशिपु ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया। सहस्त्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। लोकपालों को मारकर भगा दिया और स्वत: सम्पूर्ण लोकों का अधिपति हो गया। देवता निरूपाय हो गए थे। वह असुर हिरण्यकशिपु को किसी प्रकार से पराजित नहीं कर सकते थे।भक्त प्रह्लाद का जन्म :-अहंकार से युक्त हिरण्यकशिपु प्रजा पर अत्याचार करने लगा। इसी दौरान हिरण्यकशिपु कि पत्नीकयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम 'प्रह्लाद ' रखा गया। एक राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी प्रह्लाद में राक्षसों जैसे कोई भी दुर्गुण मौजूद नहीं थे तथा वह भगवान नारायण का भक्त था। वह अपने पिता हिरण्यकशिपु के अत्याचारों का विरोध करता था।हिरण्यकशिपु का वध :-भगवान-भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने और उसमें अपने जैसे दुर्गुण भरने के लिए हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयास किए। नीति-अनीति सभी का प्रयोग किया, किंतु प्रह्लाद अपने मार्ग से विचलित न हुआ। तब उसने प्रह्लाद को मारने के लिए षड्यंत्र रचे, किंतु वह सभी में असफल रहा। भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर संकट से उबर आता और बच जाता था। अपने सभी प्रयासों में असफल होने पर क्षुब्ध हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को अपनी बहनहोलिका की गोद में बैठाकर जिन्दा ही जलाने का प्रयास किया। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसे नहीं जला सकती, परंतु जब प्रह्लाद को होलिका की गोद में बिठा कर अग्नि में डाला गया तो उसमें होलिका तो जलकर राख हो गई, किंतु प्रह्लाद का बाल भी बाँका नहीं हुआ। इस घटना को देखकर हिरण्यकशिपु क्रोध से भर गया। उसकी प्रजा भी अब भगवान विष्णु की पूजा करने लगी थी। तब एक दिन हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा कि बता- "तेरा भगवान कहाँ है?" इस पर प्रह्लाद ने विनम्र भाव से कहा कि "प्रभु तो सर्वत्र हैं, हर जगह व्याप्त हैं।" क्रोधित हिरण्यकशिपु ने कहा कि "क्या तेरा भगवान इस स्तम्भ (खंभे) में भी है?" प्रह्लाद ने हाँ में उत्तर दिया। यह सुनकर क्रोधांध हिरण्यकशिपु ने खंभे पर प्रहार कर दिया। तभी खंभे को चीरकर श्रीनृसिंह भगवान प्रकट हो गए और हिरण्यकशिपु को पकड़कर अपनी जाँघों पर रखकर उसकी छाती को नखों से फाड़ डाला और उसका वध कर दिया। श्रीनृसिंह ने प्रह्लाद कीभक्ति से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि आज के दिन जो भी मेरा व्रत करेगा, वह समस्त सुखों का भागी होगा एवं पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त होगा। अत: इस कारण से इस दिन को "नृसिंह जयंती-उत्सव" के रूप में मनाया जाता है।नृसिंह भगवान के चर्म को बना लिया भोले ने अपना आसन :-इसके अलावा एक अन्य वजह भी है, जिसके लिए भगवान विष्णु ने ये रूप धरा। बताया जाता है कि हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद भगवान नृसिंह का क्रोध शांत ही नहीं हो रहा था। वे पृथ्वी को नष्ट कर देना चाहते हैं। इस बात से परेशान सभी देवता भोलेनाथ की शरण में गए। भोलेनाथ ने नरसिंह भगवान का गुस्सा शांत करने के लिए अपने अंश से उत्पन्न वीरभद्र को भेजा। वीरभ्रद ने काफी कोशिश की, लेकिन जब भगवान नृसिंह नहीं माने तो उन्होंने वीरभद्र गरूड़, सिंह और मनुष्य का मिश्रित शरभ रूप धारण किया।शरभ ने नृसिंह को अपने पंजे से उठा लिया और चोंच से वार करने लगा। शरभ के वार से आहत होकर नृसिंह ने अपना शरीर त्यागने का निर्णय लिया और शिव से निवेदन किया कि इनके चर्म को शिव अपने आसन के रूप में स्वीकार करें। इसके बाद शिव ने इनके चर्म को अपना आसन बना लिया। इसलिए शिव वाघ के खाल पर विराजते हैं। इस दिन जो भी व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करता है, उसे सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पाकर मोक्ष की भी प्राप्ति करता है। भगवान नृसिंह की पूजा के लिए फल, फूल और पंचमेवा का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए उनके नृसिंह गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।व्रत विधि :-नृसिंह जयंती के दिन व्रत-उपवास एवं पूजा-अर्चना कि जाती है। इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए तथा भगवान नृसिंह की विधी विधान के साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए। भगवान नृसिंह तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति स्थापित करना चाहिए, तत्पश्चात् वेद मंत्रों से इनकी प्राण-प्रतिष्ठा कर षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। भगवान नृसिंह की पूजा के लिए फल , पुष्प , पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल , अक्षत व पीताम्बर रखना चाहिए। गंगाजल , काले तिल, पंच गव्य व हवन सामग्री का पूजन में उपयोग करें। भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए उनके नृसिंह गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। पूजा के पश्चात् एकांत में कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से नृसिंह भगवान के मंत्र का जप करना चाहिए। इस दिन व्रती को सामर्थ्य अनुसार तिल , स्वर्ण तथा वस्त्रादि का दान देना चाहिए। इस व्रत को करने वाला व्यक्ति लौकिक दुःखों से मुक्त हो जाता है। भगवान नृसिंह अपने भक्त की रक्षा करते हैं व उसकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।#Vnita🙏🙏❤️मंत्र :-नृसिंह #जयंती के दिन निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए-1. ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥2. ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः ।इन #मंत्रों का #जाप करने से समस्त #दुखों का निवारण होता है तथा #भगवान #नृसिंह की कृपा प्राप्त होती है।❤️ राधे राधे ❤️

नृसिंह जयंती सभी भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएँ  जय जय लक्ष्मी नारायण हरे......... #बाल #वनिता #महिला #वृद्ध #आश्रम की #अध्यक्ष #श्रीमती #वनिता_कासनियां #पंजाब #संगरिया #राजस्थान🙏🙏❤️ नृसिंह जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस जयंती का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्व है। भगवान श्रीनृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं। पौराणिक धार्मिक मान्यताओं एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने 'नृसिंह अवतार' लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। भगवान विष्णु ने अधर्म के नाश के लिए कई अवतार लिए तथा धर्म की स्थापना की। कथा :- नृसिंह अवतार भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक है। नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण करके दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के इस अवतरण की कथा इस प्रकार है- प्राचीन काल में कश्यप नामक ऋषि हुए थे, उनकी पत्नी का नाम दिति था। उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम 'हरिण्याक्ष' तथा दूसरे का 'हिरण्यकशिपु ' था। हिरण्याक्ष...

सूर्य का तांत्रिक मंत्र#ॐ_घृणि_ #सूर्याय_नमःसूर्य का बीज मंत्र#ॐ_ह्रां_ह्रीं_ह्रौं_सः #सूर्याय नमः#सूर्यदेव_की_व्रत_ #कथाप्राचीन काल में एक बुढ़िया रहती थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती। रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर बुढ़िया स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती, उसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करते हुए रविवार व्रत कथा सुनकर सूर्य भगवान का भोग लगाकर दिन में एक समय भोजन करती। सूर्य भगवान की अनुकंपा से बुढ़िया को किसी प्रकार की चिंता एवं कष्ट नहीं था। धीरे-धीरे उसका घर धन-धान्य से भर रहा था।उस बुढ़िया को सुखी होते देख उसकी पड़ोसन उससे जलने लगी। बुढ़िया ने कोई गाय नहीं पाल रखी थी। अतः वह अपनी पड़ोसन के आंगन में बंधी गाय का गोबर लाती थी। पड़ोसन ने कुछ सोचकर अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया। रविवार को गोबर न मिलने से बुढ़िया अपना आंगन नहीं लीप सकी। आंगन न लीप पाने के कारण उस बुढ़िया ने सूर्य भगवान को भोग नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया। सूर्यास्त होने पर बुढ़िया भूखी-प्यासी सो गई।प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उस बुढ़िया की आंख खुली तो वह अपने घर के आंगन में सुंदर गाय और बछड़े को देखकर हैरान हो गई। गाय को आंगन में बांधकर उसने जल्दी से उसे चारा लाकर खिलाया। पड़ोसन ने उस बुढ़िया के आंगन में बंधी सुंदर गाय और बछड़े को देखा तो वह उससे और अधिक जलने लगी। तभी गाय ने सोने का गोबर किया। गोबर को देखते ही पड़ोसन की आंखें फट गईं।पड़ोसन ने उस बुढ़िया को आसपास न पाकर तुरंत उस गोबर को उठाया और अपने घर ले गई तथा अपनी गाय का गोबर वहां रख आई। सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिनों में धनवान हो गई। गाय प्रति दिन सूर्योदय से पूर्व सोने का गोबर किया करती थी और बुढ़िया के उठने के पहले पड़ोसन उस गोबर को उठाकर ले जाती थी।बहुत दिनों तक बुढ़िया को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता ही नहीं चला। बुढ़िया पहले की तरह हर रविवार को भगवान सूर्यदेव का व्रत करती रही और कथा सुनती रही। लेकिन सूर्य भगवान को जब पड़ोसन की चालाकी का पता चला तो उन्होंने तेज आंधी चलाई। आंधी का प्रकोप देखकर बुढ़िया ने गाय को घर के भीतर बांध दिया। सुबह उठकर बुढ़िया ने सोने का गोबर देखा उसे बहुत आश्चर्य हुआ।उस दिन के बाद बुढ़िया गाय को घर के भीतर बांधने लगी। सोने के गोबर से बुढ़िया कुछ ही दिन में बहुत धनी हो गई। उस बुढ़िया के धनी होने से पड़ोसन बुरी तरह जल-भुनकर राख हो गई और उसने अपने पति को समझा-बुझाकर उसे नगर के राजा के पास भेज दिया। सुंदर गाय को देखकर राजा बहुत खुश हुआ। सुबह जब राजा ने सोने का गोबर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा।उधर सूर्य भगवान को भूखी-प्यासी बुढ़िया को इस तरह प्रार्थना करते देख उस पर बहुत करुणा आई। उसी रात सूर्य भगवान ने राजा को स्वप्न में कहा, राजन, बुढ़िया की गाय व बछड़ा तुरंत लौटा दो, नहीं तो तुम पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ेगा. तुम्हारा महल नष्ट हो जाएगा। सूर्य भगवान के स्वप्न से बुरी तरह भयभीत राजा ने प्रातः उठते ही गाय और बछड़ा बुढ़िया को लौटा दिया।राजा ने बहुत-सा धन देकर बुढ़िया से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। राजा ने पड़ोसन और उसके पति को उनकी इस दुष्टता के लिए दंड दिया। फिर राजा ने पूरे राज्य में घोषणा कराई कि सभी स्त्री-पुरुष रविवार का व्रत किया करें। रविवार का व्रत करने से सभी लोगों के घर धन-धान्य से भर गए, राजतय में चारों ओर खुशहाली छा गई। स्त्री-पुरुष सुखी जीवन यापन करने लगे तथा सभी लोगों के शारीरिक कष्ट भी दूर हो गए।श्री सूर्य देव की आरतीजय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव।जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता।षटपद मन मुदकारी, हे दिनमणि दाता॥जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥नभमंडल के वासी, ज्योति प्रकाशक देवा।निज जन हित सुखरासी, तेरी हम सबें सेवा॥करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव।जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी।निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी॥#Vnita 🙏🙏💞हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव

सूर्य का तांत्रिक मंत्र#ॐ_घृणि_ #सूर्याय_नमःसूर्य का बीज मंत्र#ॐ_ह्रां_ह्रीं_ह्रौं_सः #सूर्याय नमः #सूर्यदेव_की_व्रत_ #कथाप्राचीन काल में एक बुढ़िया रहती थी। वह नियमित रूप से रविवार का व्रत करती। रविवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर बुढ़िया स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती, उसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करते हुए रविवार व्रत कथा सुनकर सूर्य भगवान का भोग लगाकर दिन में एक समय भोजन करती। सूर्य भगवान की अनुकंपा से बुढ़िया को किसी प्रकार की चिंता एवं कष्ट नहीं था। धीरे-धीरे उसका घर धन-धान्य से भर रहा था।उस बुढ़िया को सुखी होते देख उसकी पड़ोसन उससे जलने लगी। बुढ़िया ने कोई गाय नहीं पाल रखी थी। अतः वह अपनी पड़ोसन के आंगन में बंधी गाय का गोबर लाती थी। पड़ोसन ने कुछ सोचकर अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया। रविवार को गोबर न मिलने से बुढ़िया अपना आंगन नहीं लीप सकी। आंगन न लीप पाने के कारण उस बुढ़िया ने सूर्य भगवान को भोग नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया। सूर्यास्त होने पर बुढ़िया भूखी-प्यासी सो गई।प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उस बुढ़िया की आंख खुली तो वह अपने घर क...